“इश्क की चादर”

💜Valentine special💜

कुछ गुलाबों के पंख
बिखरा के गये थे यहाँ,
लौटकर आए तो
उन्हें सिमटा हुआ पाए…
दे रही हैं गवाही
खामोंशियां ये रातों की,
ओढ़ के वो इश्क की थी चादर यहाँ आए….!!

Comments

4 responses to ““इश्क की चादर””

  1. बहुत खूब, सुन्दर रचना

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