इस बार

इस बार अगर ठुकरा दिया तूने
तो फिर कभी लौटकर ना आएगे
चली गई साँस भी मेरी तो भी
तुझसे कंधा ना लगवाएगे….

Comments

7 responses to “इस बार”

  1. बहुत ही भावपूर्ण

  2. Geeta kumari

    हृदय स्पर्शी पंक्तियां

  3. Praduman Amit

    इतनी नफरत भी अच्छी नहीं। लचना लाजवाब है।

  4. Praduman Amit

    मुझे खेद है लचना की जगह रचना पढ़े ।

  5. Satish Pandey

    चली गई साँस भी मेरी तो भी
    तुझसे कंधा ना लगवाएगे….
    अत्यंत गहरा भाव है। श्रृंगार के वियोग पक्ष का बखूबी चित्रण है। अंत स्थिति तक की चेतावनी बड़ी सहजता से प्रकट हुई है।

  6. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर

Leave a Reply

New Report

Close