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  1. सड़क किनारे बैठे निर्धन व्यक्ति की बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है कवि सतीश जी ने ।कोई त्यौहार हो या रौनक हो मगर मैं एक सा रहा अब तकपड़ा हूँ इस तरह से बेदम हो,राग कहाँ रागिनी कहाँ मेरी’… हृदय स्पर्शी रचना

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