ईर्ष्या

क्या कभी विजय नहीं देखी,
जो इतना घबराते हो

जिसमे कवि का गुण नहीं,
और कवि कहलाते हो

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

Comments

3 responses to “ईर्ष्या”

  1. राम नरेशपुरवाला

    वाह

  2. राम नरेशपुरवाला

    अति सुन्दर

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