उड़ गई वरदान की चादर

बाल हत्या का ले के विचार ‘
हो गई अग्नि में होलिका सवार।
उड़ गई वरदान की चादर
अजर रहा बालक प्रह्लाद
जल गई होलिका हो तार तार।।

Comments

4 responses to “उड़ गई वरदान की चादर”

  1. In baton ko to hm bhool hi jate h

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