उदासी का आलम

उदासी का आलम
इस कदर छाया है
रूबरू मेरे एक धुंध छाया है
हौसले पंख लगा के उड़ने
को तैयार हैं पर
मेरे पंखों को किसी ने
काटकर गिराया है..

Comments

4 responses to “उदासी का आलम”

  1. Geeta kumari

    Oh , heart touching lines

  2. उदासी की सुंदर अभिव्यक्ति

  3. बहुत सुंदर पंक्तियां

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