बालों में लगे रबर की तरह
खिंचे चले जा रहे तो तुम,
खिंच रहे हो मगर बांध रहे हो
सभी को एकजुट,
जिससे निखर रही है चोटी,
एकजुटता से ही हम
छूँ सकते हैं चोटी,
मुश्किलें कर सकते हैं आसान
सफलता पा सकते हैं मोटी।
एकजुटता
Comments
4 responses to “एकजुटता”
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Wow, nice poem
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मुश्किलें कर सकते हैं आसान
सफलता पा सकते हैं मोटी।
,_____एकजुटता पर आधारित बहुत सुंदर रचना।एकता में ही सफलता है, यह दर्शाती हुई उत्तम रचना -

वाह, अति उत्तम
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बालों में लगे रबर की तरह
खिंचे चले जा रहे तो तुम,
खिंच रहे हो मगर बांध रहे हो
सभी को एकजुट,
जिससे निखर रही है चोटी,एकता में शक्ति है यही बतलाती हुई पंक्तियां
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