एक ही घर में चार चूल्हे रख लिए,
मां को निकाल बाहर करो,करो नई गृहस्थी की शुरुआत,
जिस मां की उंगली थाम दुनिया देखी,
उस मां को साथ लेकर चलने में आज बेटे भी शर्मात हैं,
वाह भाई क्या बात है,
365 दिन में सिर्फ एक ही दिन क्यों मनाए मातृ दिवस,
365 दिन में रोज अपनी मां को सम्मान और प्यार देकर मनाए मातृ दिवस,
तब तो भाई कुछ बात है।।
–✍️एकता–
एक दिन का मातृ दिवस(२)
Comments
6 responses to “एक दिन का मातृ दिवस(२)”
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365 दिन में रोज अपनी मां को सम्मान और प्यार देखकर मनाए मातृ दिवस,
बिल्कुल सही,बहुत सुंदर -

👌👌👌
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बहुत खूब, बहुत सुन्दर,
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Great
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वाह वाह
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बहुत खूब
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