हम सब दीप तो जलायेंगे,
बाहरी अंधेर को दूर करने के लिए।
मगर हम वो दीप कब जलायेंगे
मन में छिपे अंधेर को दूर करने के लिए।।
हम हर वर्ष बड़ी उल्लास के साथ
घर आंगन में जलाते है अनेक दीया।
छल कपट के छाती पर कब हम
जलायेंगे स्वच्छता के “एक ही दीया” ??।।
एक ही दीया
Comments
4 responses to “एक ही दीया”
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बहुत उम्दा
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बहुत सुन्दर👌👌👌👌👌🙂
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सुन्दर भाव
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बहुत खूब
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