ऐसा मेरा देश हो जाए
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आओ भारत नया बनाए,
सपनों का संसार बसाये।
नए महल सा देश सजाएं,
उन्नति का परचम फहराए।
चारों तरफ हरी हो धरती,
स्वस्थ सड़क हर जगह हो दिखती ।
धुली साफ सी रहे यह धरती, सुलभ भली सी लगे जिंदगी। धुआं प्रदूषण कहीं ना फैले,
स्वच्छ हवा की न नैमत ले ले। स्वच्छ हवा और शुद्ध वातावरण, सुंदर हो हम सब का आचरण। वैज्ञानिक परचम लहराए, खिलाड़ी तिरंगे की शान बढ़ाएं। स्वर्णिम युग फिर वापस आए, ऐसा मेरा देश हो जाए।
निमिषा सिंघल
ऐसा मेरा देश हो जाए
Comments
2 responses to “ऐसा मेरा देश हो जाए”
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सुंदर रचना
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वाह
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