ऐसी रंग में खोयेंगे,
अबकी बार होली में ।
जहां-की-सारी – की – सारी कोशिशें
नाकाम होगी, हमें बेरंग करने में ।
जहां को ढ़ालेंगे,
हम अपनी रंगों में ।
वो लाख कोशिश करेंगे,
हम बेरंग करने की ।
फिर भी वह नाकाम रहेगी,
हमें असफल करने में ।।
ऐसी रंग में खोयेंगे,
अबकी बार होली में । ।
विकास कुमार
पिछले साल की रचना
ऐसी रंग में खोयेंगे
Comments
4 responses to “ऐसी रंग में खोयेंगे”
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बहुत सुंदर रचना, जय राम जी की🙏
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जय श्री राम
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सुंदर
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ऐसी रंग में खोयेंगे,
अबकी बार होली में ।
जहां-की-सारी – की – सारी कोशिशें
नाकाम होगी, हमें बेरंग करने में ।
जहां को ढ़ालेंगे,
हम अपनी रंगों में ।
वो लाख कोशिश करेंगे,
हम बेरंग करने की ।__________
सुंदर पंक्तियों के द्वारा आपने अपने कविता को सजाया और संवारा है विचारणीय मुद्दा उठाया है।।
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