ऐसे मत नववर्ष मनाओ
जीवों को ना मार के खाओ,
भूंख मिटाने के हैं और भी साधन
शाकाहार तुम बनाकर खाओ..
ऐसे मत नववर्ष मनाओ
Comments
4 responses to “ऐसे मत नववर्ष मनाओ”
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क्षुधा मिटाने की खातिर, निर्दोषों को क्यूं मारा जाता है कैसा शैतान होता है वो मानव, जो अपनी खुशी के लिए जीवों की जान लेता है
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शानदार
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बहुत खूब
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