“ऐ फ़लक ऐ हवा वो नजारा क्या हुआ”

ऐ फ़लक ऐ हवा वो नजारा क्या हुआ।
हर शाम जो दिखा था वो सितारा क्या हुआ।।
,
हमसें निभाया न गया क़िरदार जिंदगी का।
जब छोड़ दी है दुनिया फिर तमाशा क्या हुआ।।
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झूठी थी सारी कसमें फिर भी यक़ीन किया।
हमनें किया था ये क्यूँ अब इज़ाफ़ा क्या हुआ।।
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ख़त में नहीं था कुछ भी तुमको भी था पता।
जो साथ गया था उसके वो लिफ़ाफ़ा क्या हुआ।।
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साहिल से कह जो देते वो रह जाता भँवर में।
इरादतन डुबोके वैसे तुम्हारा मुनाफ़ा क्या हुआ।।
@@@@RK@@@@

Comments

11 responses to ““ऐ फ़लक ऐ हवा वो नजारा क्या हुआ””

  1. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    BAHUT KHOOB

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      धन्यवाद

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      शुक्रिया

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      धन्यवाद

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      धन्यवाद

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. Abhishek kumar

    बेहतरीन सृजन

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