ऐ फ़लक ऐ हवा वो नजारा क्या हुआ।
हर शाम जो दिखा था वो सितारा क्या हुआ।।
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हमसें निभाया न गया क़िरदार जिंदगी का।
जब छोड़ दी है दुनिया फिर तमाशा क्या हुआ।।
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झूठी थी सारी कसमें फिर भी यक़ीन किया।
हमनें किया था ये क्यूँ अब इज़ाफ़ा क्या हुआ।।
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ख़त में नहीं था कुछ भी तुमको भी था पता।
जो साथ गया था उसके वो लिफ़ाफ़ा क्या हुआ।।
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साहिल से कह जो देते वो रह जाता भँवर में।
इरादतन डुबोके वैसे तुम्हारा मुनाफ़ा क्या हुआ।।
@@@@RK@@@@
“ऐ फ़लक ऐ हवा वो नजारा क्या हुआ”
Comments
11 responses to ““ऐ फ़लक ऐ हवा वो नजारा क्या हुआ””
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BAHUT KHOOB
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धन्यवाद
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Umda Alfaaz
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शुक्रिया
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बेहतरीन
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धन्यवाद
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So Nice
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धन्यवाद
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Good
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वाह बहुत सुंदर
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बेहतरीन सृजन
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