ग़ज़ल-ऐ-शराब……

एक शराब की कहानी है ये
एक शराबी की जुबानी है ये

पीता है वो सुबह-शाम जी भर के
एक शराबी की ईमानदारी है ये

सुकून देती है ये बहुत दिल में जाने के बाद
एक शराबी की मन की मानी है ये

क्यों कोसते है अक्सर सभी इसको दुनिया में
एक शराबी की दिलबर जानी है ये

बहुत हँसीन पल हो जाते है इसको पीने के बाद
एक शराबी ने खुले-आम बात मानी है ये

Dev Kumar

Comments

10 responses to “ग़ज़ल-ऐ-शराब……”

    1. Dev Kumar Avatar
      Dev Kumar

      THanku Seema Ji

  1. Mithilesh Rai Avatar

    वाह वाह बहुत खूब

    1. Dev Kumar Avatar
      Dev Kumar

      THanku Mithlesh Ji

    1. Dev Kumar Avatar
      Dev Kumar

      THanku

  2. Mithilesh Rai Avatar

    बेहतरीन सृजन

    1. Dev Kumar Avatar
      Dev Kumar

      Thanku so so much MIthlesh JI

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

  4. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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