ओस की बुंदों को,
चमकते देखा है।
उनकी आंखों में,
कहीं बिखर न जाए।
मेरे छूने से।
ओस की बूंदों को।
Comments
12 responses to “ओस की बूंदों को।”
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Wah
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धन्यवाद सर
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सुंदर
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बहुत बहुत आभार सर
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अच्छी कविता
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धन्यवाद सर
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Amazing!😊🤗
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धन्यवाद
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AAP ek successful kaviytri hai
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बहुत बहुत आभार
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वाह
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धन्यवाद सर
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