ओ माँ ! :- तेरी पूजा ईश्वर से पहले

ममता की मूरत है तू
निज प्राणों की सूरत है तू
हे ममता की मूरत !
लक्ष्मी की सूरत है तू
तूने हमको जन्म दिया
खाने को मीठा भोग दिया
महीने रखकर पेट में तूने
अपने रक्त से यह जीवन सिंचित किया
तेरी पूजा इश्वर से पहले
क्यों न हो ? आखिर क्यों न हो ?
तू ही है मेरी प्राणदायनी
तू ही तो गंगाजल है
ओ माँ ! तेरे चरणों में
इस प्रज्ञा’ का नत मस्तक है।।

Comments

One response to “ओ माँ ! :- तेरी पूजा ईश्वर से पहले”

  1. ममता की मूरत है तू
    निज प्राणों की सूरत है तू
    हे ममता की मूरत !
    लक्ष्मी की सूरत है तू
    तूने हमको जन्म दिया
    खाने को मीठा भोग दिया
    महीने रखकर पेट में तूने
    अपने रक्त से यह जीवन सिंचित किया।।
    सच ही तो लिखा है आपने हमारी जिंदगी माँ से ही होती है मां के लिए इतना प्रेम देखकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा माँएक ऐसी पाठशाला है
    जहां हम मानवता सीखते हैं।।

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