औरत

औरतों के घर कहाँ होते हैं जहाँ पैदा हुई वो मायका जहाँ शादी हुई वो ससुराल।
औरतों के अपने कहाँ होते हैं।
एक के लिए पराया धन
दूजे के लिये पराये घर से आयी परायी लड़की। औरतों के सपने कहाँ होते हैं शादी से पहले माँ बाप की कहना सुनना शादी के बाद ससुराल की किसी बात का विरोध न करना
औरतों की जिंदगी कहाँ होती हैं
बचपन में माँ बाप के लिये जीयी
यौवन में पति व ससुराल के लिये मरी औरतों में चेतना कहाँ होती है बचपन माँ बाप जो कहें वही महसूस करती हैं यौवन में पति जो कहे वो ही अहसास करती हैं।
औरतों के नाम कहाँ होते हैं 
बचपन में किसी की बिटिया
यौवन में किसी की बहू
बुढ़ापे में किसी की मईया। और लोग फिर भी कहते हैं 
नारी देवी होती हैं।
पर देवी इतनी गुण विहीन नहीं होती
पारुल शर्मा

Comments

2 responses to “औरत”

  1. Abhishek kumar

    Good

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