कदरदान

उसके शहर का मौसम हमने वीरान देखा
एक रोता हुआ तन्हा शमशान देखा

मेहमान नवाज़ी ऐसी भी होगी सोचा न था
न कभी हमने ऐसा कदरदान देखा……………………………!!

Comments

One response to “कदरदान”

  1. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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