कभी -कभी तो आते हैं
तुमसे मिलने!
यूँ मुँह ना फेरो हमसे
रूठे हो तो रूठे रहो
नज़रें तो मिलाओ हमसे।
इतना गुस्सा भी ठीक नहीं साहिब!
यूँ मलाल लिये बैठे हो
सज़ा देनी है तो दे देदो मगर
खता क्या हो गयी है ये तो बताओ हमसे।
कभी-कभी
Comments
13 responses to “कभी-कभी”
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Wah
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थैंक्स
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Nice 👏👏
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आभार
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Khub likha
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आभार
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Nice
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धन्यवाद आदरणीय
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सुंदरतम है
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धन्यवाद
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Good
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Great
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Good
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