ता-उमर लगायी दौलत कमाने मैं तूने
जो कमाया अब वोही तो तेरा है बंदिया
बेवफ़ाई पे मेरी क्यों तूँ इतना बिखर गया
वफ़ा तूने क्मायी ही कहा, जो ढूँढे बंदिया
हाँ दौलत से मिलती नही वफा बाज़ार मैं
ना यह अब तलक़ तूँ समझ पाया बंदिया
कमाए तूने पत्थर, चाहता है हीरे बंदिया
यह तो ना है मेरे दर का इंसाफ बंदिया
…… यूई
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