2 Comments

  1. विकास जी, कविता लिखने और कवि बनने के लिए शब्द साधक तो बनना ही पड़ता है। पहले शब्दों को शुद्ध रूप में लिखना सीखना होता है, तब किसी साहित्यिक मंच में कविता लिखनी होती है, फिर खुद को कवि माना जाता है। यदि शब्द और वाक्य अशुद्ध हों तो वह कविता नहीं, भाषा के साथ अन्याय है।
    आपके द्वारा लिखी गई इस कविता में आपने इतनी अशुद्धियां की हैं–
    1- शीर्षक में ही गलती है, ‘कमाल हैं’ होना चाहिये था।
    2- खुद को खूद लिखा है।
    3-ज्ञानी को ग्यानी लिखा है।
    4-हम क्या हैं? लिखने की बजाय हम क्या है? लिखा है।
    इसलिए कविता से पहले भाषा तो सीखनी ही चाहिए। आपने लिखा है -वह हिन्दी का संतान कहाँ ? सही बात है जब कोई हिंदी को विकृत रूप में लिखे तो उसे क्या कहेंगे।

  2. विकास जी आपके पास शब्द तो है मुझे लगता है है टाइपिंग में दिक्कत हो रही है आप voise टाइप कर एक बार देख सकते सकते हैं आप अच्छा कर सकते हैं इसमें कोई dought नहीं
    दोस्त लगे रहो

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