कमियां हमारी

दिखाईं देता है,
तुझे अपना दुःख,
और तकलीफें भी,
और नज़र आ जाती है,
अपनी अच्छाईयां भी,

मगर मानुष! तू बहुत लालची,
दिखावे के लिए तुने,
क्या-क्या नहीं किया,
फिर दिखाई देती है,
तुम्हें अपनी बेबसी।

बस एक चीज ,
जो दिखाई नहीं देती,
खोट अपना!
कमियां अपनी!

Comments

12 responses to “कमियां हमारी”

  1. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    रचना के माध्यम से सत्यता को परिभाषित किया गया है, खूबसूरत पंक्तियां

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      हार्दिक धन्यवाद🙏

  2. This comment is currently unavailable

  3. मैं भी समझ गई हूँ भैया जी , बहुत खूब

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद🙏
      क्या समझ गए हो जरा मुझे भी बताओ 😁😊

  4. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏 जी

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  5. अतिसुन्दर

  6. Pratima chaudhary

    बहुत खूब

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