कमियां हमारी
दिखाईं देता है,
तुझे अपना दुःख,
और तकलीफें भी,
और नज़र आ जाती है,
अपनी अच्छाईयां भी,
मगर मानुष! तू बहुत लालची,
दिखावे के लिए तुने,
क्या-क्या नहीं किया,
फिर दिखाई देती है,
तुम्हें अपनी बेबसी।
बस एक चीज ,
जो दिखाई नहीं देती,
खोट अपना!
कमियां अपनी!
रचना के माध्यम से सत्यता को परिभाषित किया गया है, खूबसूरत पंक्तियां
हार्दिक धन्यवाद🙏
हा हा समझ गया भाई..
बहुत अच्छे
बहुत बहुत आभार
मैं भी समझ गई हूँ भैया जी , बहुत खूब
बहुत बहुत धन्यवाद🙏
क्या समझ गए हो जरा मुझे भी बताओ 😁😊
बहुत ख़ूब
बहुत बहुत धन्यवाद 🙏 जी
Sunder
बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
अतिसुन्दर
बहुत खूब