कलम की स्याही को फीकी होने न देना,
जो ज़िंदा हैं इतिहासों में मुर्दा होने न देना,
छीन भी ले गर तुमसे कोई कविता तुम्हारी,
अपनी कलम का वजूद पर कभी मिटने न देना।।
राही (अंजाना)
कलम की स्याही को फीकी होने न देना
Comments
2 responses to “कलम की स्याही को फीकी होने न देना”
-

,जी सही बात
-

Thank you
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.