कलम की स्याही को फीकी होने न देना

कलम की स्याही को फीकी होने न देना,
जो ज़िंदा हैं इतिहासों में मुर्दा होने न देना,
छीन भी ले गर तुमसे कोई कविता तुम्हारी,
अपनी कलम का वजूद पर कभी मिटने न देना।।
राही (अंजाना)

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