………पानी बचा लो……..
पानी नही बचा तो धन करोगे क्या बटोर कर
पानी बचा लो अपना कोई जतन निहोर कर |
कब तक पिलाएगी धरा छाती निचोड़ कर
गिरते ही जा रहे हो सब सरहदों को तोड़ कर||
पानी नही सूखी पड़ी नदियाँ हैं हर कही
गुस्सा निकालते क्या गगरी घड़े को तोड़ !
तुम भी दरक्खतों से दिल लगा लो दोस्तों
एक पेड़ लगा लो तुम सब उलझनों को छोड़ !!
उपाध्याय…
कविता-पानी बचा लो
Comments
2 responses to “कविता-पानी बचा लो”
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umda…
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Good
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