10 Comments

  1. प्रज्ञा जी, बहुत सुंदर कविता है और किसी के कुछ
    कह देने से इतना विचलित नहीं होते। बुरा लगता है,
    मैं समझ सकती हूं ।आप दुखी ना हो हम सब आपके साथ हैं।

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