“पुलवामा शहीदों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली”
पीठ पे वार करना, तुम्हारी पुरानी कुनीति है।
आमने – सामने की रण, तुमने कब जीती है।
कायरता के प्रमाण से तुम्हारे, अनभिज्ञ नहीं,
पराजय की, सदैव तुम्हारे हृदय में भीति है।
पौरूषता तो तुममें, कभी देखी नहीं हमने,
धृष्टता दर्शाती, नपुंसकता तुम्हारी प्रकृति है।
मानवता की बात बेमानी, जरा ना तुमने जानी,
निर्दोषों को मारना, तुम्हारी मानसिक विकृति है।
किया पीठ पर वार, अब हो जाओ तुम तैयार,
चुन – चुन कर तुम्हारी, अब चढ़ानी आहुति है।
देवेश साखरे ‘देव’
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