अपनी पड़ोसनों को
किट्टी पार्टी में जाते
जब भी देखती थी
मन से कभी आह तो
कभी गाली निकलती थी
मुझे भी किट्टी पार्टी का
भूत सवार था अब तो
पतिदेव का जीना दुश्वार था
उन्हें शायद ये बातें
गवारा ना थी पर मेरी
कोशिशें कुछ कम ना थी
कभी रूठकर कभी मानकर
उनका जीना दूभर कर दिया
करवाचौथ पर ये शर्त
रख दी जो भी मांगूगी
वही लूंगी वर्ना भूख से
प्राण दे दूंगी जब मेरा
इरादा मजबूत देखा
मैंने उन्हें कांपते देखा
जब मैंने उन्हें कांपते देखा
मेरे मन में खुशी की लहर दोड़ी
तभी मैंने अपने भूख से
मरने की कसम थोड़ी
अब तो मुझे हर जिद्द
मनवाने का तरीका आगया था
अब तो बिना रूठे
हर बात मान लिया करते हैं
एक – दूसरी को नीचा
दिखाने की होड़ में
हालात इतने बिगड़ चुके है
घर से बेघर हो गये है
बच्चे भी पब्लिक स्कूलों से
सरकारी स्कूलों में जाने लगे
अकेले मे बैठकर अपनी
बेबसी पर आंसू बहाती हूँ
शायद फिर से
वो दिन लोटकर आयेगे
ये सोचकर मन को ढाड़स
बंधाती हूँ पतिदेव की आज्ञा
पालन करना अपना धर्म
समझती हूँ किट्टी पार्टी मन में होदिखानेकी
कांटा बनकर रह गई और
जिंदगी भर की चुभन दे गई
प्रस्तुति – रीता अरोरा
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