निस दिन गिरता जाए
मानव देखो यार
बातें मुंह पर मीठी करें
पीठ पीछे गरियाए
घोल के शर्बत जहर का
पीने को देता है
इतना छल है संसार में
मानव धोखे देता है।
कितना छल है संसार में
Comments
4 responses to “कितना छल है संसार में”
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Nice यथार्थ
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धन्यवाद
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वाह
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आपका आभार
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