किताबों में ही दिखती हैं

ये हमदर्दी की बातें
बस किताबों में ही दिखती हैं
मोहब्बत तो आजकल यार
बाजारों में बिकती है
भरोसा किस पर करें और
प्यार भी किससे करें आखिर
आजकल तो दिल की दुनिया
महज अपनों से लुटती है।।

Comments

2 responses to “किताबों में ही दिखती हैं”

  1. राकेश पाठक

    अति सुंदर भाव

    1. Pragya

      धन्यवाद

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