किश्तों की मुहब्बत !

किश्तों में ही मिली, तेरी मुहब्बत हमें।
जो ना मासिक थी, न ही सालाना।

पल दो पल की मुलाकातें थीं।
ना रूठना हुआ, ना मनाना।

कभी एक-मुश्त मिले होते, तो हम करते जी भर के दीदार तेरा।
पर शायद हमारे नसीब में ही नहीं था प्यार तेरा।

Comments

12 responses to “किश्तों की मुहब्बत !”

  1. बहुत सुंदर

    1. Tarun Bhatnagar Avatar
      Tarun Bhatnagar

      धन्यवाद!

    1. Tarun Bhatnagar Avatar
      Tarun Bhatnagar

      हार्दिक आभार!

  2. Geeta kumari

    Nice lines

    1. Tarun Bhatnagar Avatar
      Tarun Bhatnagar

      हार्दिक धन्यवाद

    1. Tarun Bhatnagar Avatar
      Tarun Bhatnagar

      धन्यवाद

    1. Tarun Avatar

      हार्दिक धन्यवाद।

  3. अति सुन्दर

    1. Tarun Avatar

      धन्यवाद। 

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