2 Comments

  1. कुमार विश्वास की तरह लिखी सुन्दर रचना ।

    कोई पथ्थर की मूरत है
    किसी पथ्थर में मूरत है
    लो हमने देख ली दूनियाँ
    जो इतनी खूबसूरत है।।

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