कुंडी खोलो ना

कुंडी खोलो ना दिल की
नई सुबह है खिली सुहानी
चिड़िया भी कहती,
भजन करो ईश्वर का मन से
क्यों जिह्वा सिल दी।
दिनकर की किरणों ने आकर
शक्ति नई भर दी।
कुंडी खोलो ना दिल की

Comments

2 responses to “कुंडी खोलो ना”

  1. अति सुन्दर

    1. बहुत धन्यवाद गीता जी

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