“कुछ नवीन विधाएं”

काश ! हम सीख पाते तुमसे
साहित्य की कुछ नवीन विधाएं
पर ना जाने कहां तुम खो गई
ओ सखी! तुम कहां चली गई
यूँ तो उम्र में तुम मुझसे
बहुत बड़ी हो
पर हमारा रिश्ता तो दोस्ती का है ना
काश! तुम समझ जाती
कि मैं तुम्हें कितना प्यार करती हूँ
हर रोज तुम्हारा इंतजार करती हूँ तुम्हारी कविताओं को पढ़ कर
हँस देती हूँ,
और उन जज्बातों में थोड़ा जी लेती हूँ।

Comments

7 responses to ““कुछ नवीन विधाएं””

  1. अतिसुंदर रचना 

    1. Pragya

      धन्यवाद

  2. Amita

    बहुत सुंदर भाव

    1. Pragya

      धन्यवाद आपका

  3. Ekta

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति प्रज्ञा जी

    1. Pragya

      बहुत बहुत आभार आपका

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