वो मेरी काली जुल्फ़ों को
घटाओं सा सुंदर कहते थे
आंखो को मेरी वो
ठहरा हुआ समंदर कहते थे
आज वो करीब नहीं तो
सोचती हूं अक्सर
कैसी होती मैं,
अगर वो होते साथ मेरे?
कैसी होती मैं?
Comments
5 responses to “कैसी होती मैं?”
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Nice
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Nice
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Wah👏👏
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Very nice
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उपमा अलंकार का सुंदर प्रयोग करते हुए कवियित्री ने
अपने भावों को शब्दों में पिरोया है
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