कोई मुझे समझाओं,
मैं समझना चाह रहा हूं,
ये ग़म की आंधी है,
वो उड़ जाएंगी,
ज़रा सा दिल्लासा दो,
मैं तड़पे जा रहा हूं।
अरे! कोई थोड़ा सा तो प्यार
जताओ मुझे
मैं तरसे जा रहा हूं।
कोई मुझे समझाओं…..
Comments
13 responses to “कोई मुझे समझाओं…..”
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बहुत ही सुन्दर
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बहुत बहुत धन्यवाद, सुप्रभात 🙏
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बहुत खूब।
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बहुत बहुत धन्यवाद मैडमजी
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आधिंया उन्हें क्या गिरा पाएगी,
जिनका जीवन खुद एक तुफान हो|-

बहुत ही उम्दा
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बहुत अच्छा लिखा है आप ने🙏
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बहुत बहुत धन्यवाद ऋषि जी
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Wlcm
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Chaa gaye Mohan bhai
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भाई जी बहुत बहुत धन्यवाद
ये लिखने का हौसला आप लोगों के प्रेम से ही आता है -
Atisunder
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धन्यवाद शास्त्री जी 🙏
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