कोरोना

इंसान इंसान से डरने लगा
अदृश्य जीवों से मरने लगा,
ज़िन्दगी महकती थी जिन लोगों से कभी,
उनसे मिलने से मुकरने लगा।
वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा,
गया वक्त फिर लौट के आएगा।
मिलकर,”अकेले – अकेले”, ये दुआ करने लगा।रोना

Comments

11 responses to “कोरोना”

  1. Geeta kumari

    “रोना ” In the last line, is typing mistake.this is not in the poem. Sorry

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर पंक्तियां

    1. धन्यवाद जी 🙏

  3. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Sunder

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

  4. बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  5. Anuj Kaushik

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  6. Piyush Joshi

    बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद आपका पीयूष जी

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