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  1. फिर सुबह एक नई रोशन हुई,
    फिर उम्मीदें नींद से झांकती मिली,
    वक़्त का पंछी घरोंदे से उड़ा,
    अब कहाँ ले जाए तूफाँ क्या पता|

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