क्या रखा है–?संसार के विकार में

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दुनियादारी के बाज़ार में
फँस गए हम व्यापार में
लाभ-हानि में हुई बेवकुफियाँ
मान-हानि भी व्यवहार में

नज़र-नज़र की बात निराली
नज़र ने नज़र से हर बात कह डाली
नज़र की नज़र से हुई तक़रार भी
नज़र फिर भी नज़र.के इंतजार में

दिल और ज़ुबाँ की हाथापाई
हालात ज़ुबाँ के हाथ आई
कसक-दिल की छटपटाहट कौन जानें
दिल फिर भी ज़ुबाँ के गिरफ्तार में

भावना-औपचारिकता के चोट में
खुशी छिप गई न जाने किसी ओट में
दरिया नैनों की अब सुखी पड़ रही
पतझड़ सा मौसम है,बहार में

कौन-किसको-कितना पूछता है–?
आज रिश्तों का आधार “उपयोगिता”है
अर्थ में दब गया इश्क़–मुहब्बत
और,प्यार फँस गया मँझधार में

बंधनों में कमी कसावट की
क्या दोष है निर्दोष चाहत की–?
आग़ोश कर रही निवेदन –ऐ ज़िन्दग़ी
दौड़ आओ न बस मेरी पुकार.में—
क्या रखा है–?संसार के विकार में–

Comments

One response to “क्या रखा है–?संसार के विकार में”

  1. Abhishek kumar

    Good

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