क्यों तूँ सोचता रहा

जाने क्यों तुम नाराज हुए, ख़ुद ही मुझको ज़ुदा किया

ना थे हम हमराज़ कभी, फिर क्यों यह शिकवा किया

ताउमर चली तूने अपनी राह्, दिल मेरा लोच्ता रहा

चला जब मैं अपने दिल की राह्, क्यों तूँ  सोचता रहा

…… युई

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One response to “क्यों तूँ सोचता रहा”

  1. Abhishek kumar

    Wow

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