क्यों रखना है भेद

मत भूलो सब एक हैं, क्यों रखना है भेद,
मानव हैं मानव सभी, क्यों रखना संदेह।
क्यों रखना संदेह, न कोई बड़ा न छोटा,
भेदभाव ने मनुज कुल का गला है घौंटा।
कहे सतीश सब एक, देख यह जन्म और गत,
सभी एक से मानव हैं तू भेद बना मत।

Comments

6 responses to “क्यों रखना है भेद”

  1. मानवता का पाठ पढ़ाती कवि सतीश जी की रचना।।

  2. बहुत खूब, अति उत्तम

  3. Geeta kumari

    कहे सतीश सब एक, देख यह जन्म और गत,
    सभी एक से मानव हैं तू भेद बना मत।
    ___________ सभी मनुष्य को एक समान मानती हुई, और किसी में भी भेदभाव न करने की प्रेरणा देती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना, समाज को सुंदर साहित्य प्रदान करती ..अति उत्तम रचना

  4. Deepa Sharma

    बहुत सुंदर विचार और सुंदर भावनाएं

  5. अति उत्तम विचार

Leave a Reply

New Report

Close