6 Comments

  1. “मूंगफलियां बेचते जो
    दौड़ते हैं गाड़ियों में
    उन निरीहों की व्यथा को
    क्यों समझते हो नहीं।”
    बड़ी ही मार्मिक अभिव्यक्ति

  2. जब कोई बच्ची दिखाती
    खेल रस्सी में कदम रख
    तालियों के साथ
    मजबूरी समझते हो नहीं।
    _______एक वर्ग की मजबूरियों को दर्शाती हुई और कठिन जीवन के प्रति समाज की चेतना जागृत करवाती हुई कवि सतीश जी की यथार्थ परक रचना और उसकी मार्मिक अभिव्यक्ति। भाव और शिल्प बेहद मजबूत हैं, अति उत्तम प्रस्तुति

Leave a Reply