“खरोंचे “

ज़िन्दगी कितनी खरोंचे दोगी_?

अब तो रूह का रेशा-रेशा भी छील गया_

-PRAGYA-

Comments

5 responses to ““खरोंचे “”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Wah

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