Author: Pragya Deole

  • फासलों के शूल

    फासलों के शूल

    एक ज़माने से तेरी तस्वीर लिये बैठे हैं_

    तुमने फासलों पर शूल चढ़ा रखे हैं जब भी नज़दीक आते हो दिल में हमारे चुभते बहुत हैं_

    -PRAGYA-

  • वो सड़क का बेटा

    वो सड़क का बेटा

    वो तरस रहा था माँ की ममता
    बाबा के दुलार को_

    मगर तकदीर में अनाथ होना था
    सड़क उसकी बिछौना था_

    पल-पल हर शख्स में उसने ढूँढा था
    वही एक तो उसका सपना था_

    कई रातों की लोरी अंतहीन दुलार
    पर तकदीर में रिश्तों की टोकरी खाली थी_

    वो तन्हा ही ज़िन्दगी का सफर काट रहा था_

    आँसू बो रहा था दिल में
    दर्द की फसल काँट रहा था_

    मिला नहीं जो उसे प्यार
    वो सबको बाँट रहा था_

    ज़रूरत नहीं थी किसी को उसकी
    वो अंतिम साँसे भी सड़क पर ले रहा था__

    सब जी रहे थे वो मर रहा था__
    वो सड़क पर जन्मा सड़क पर ही चल बसा__

    किसी की आँख में आँसू न थे..इंसां था
    जानवर की तरह मर गया__

    फिर एक सड़क थी
    फिर एक दर्द का अंत हो गया__

    अंतिमसंस्कार गर्द में ही
    कचरेवाले ने कचरे में ही कर दिया___

    -PRAGYA-

  • वो सड़क का बेटा

    वो तरस रहा था माँ की ममता
    बाबा के दुलार को_

    मगर तकदीर में अनाथ होना था
    सड़क उसकी बिछौना था_

    पल-पल हर शख्स में उसने ढूँढा था
    वही एक तो उसका सपना था_

    कई रातों की लोरी अंतहीन दुलार
    पर तकदीर में रिश्तों की टोकरी खाली थी_

    वो तन्हा ही ज़िन्दगी का सफर काट रहा था_

    आँसू बो रहा था दिल में
    दर्द की फसल काँट रहा था_

    मिला नहीं जो उसे प्यार
    वो सबको बाँट रहा था_

    ज़रूरत नहीं थी किसी को उसकी
    वो अंतिम साँसे भी सड़क पर ले रहा था__

    सब जी रहे थे वो मर रहा था__
    वो सड़क पर जन्मा सड़क पर ही चल बसा__

    किसी की आँख में आँसू न थे..इंसां था
    जानवर की तरह मर गया__

    फिर एक सड़क थी
    फिर एक दर्द का अंत हो गया__

    अंतिमसंस्कार गर्द में ही
    कचरेवाले ने कचरे में ही कर दिया___

    -PRAGYA-

  • तड़पती मोहब्बत

    तड़पती मोहब्बत

    हर पहर गुज़र जाता हैं
    छूकर मुझे एक अन्जाना सा_

    हम ज़िन्दगी थामकर तेरे ही
    ख्वाबों को तराशते रहते हैं_

    तु अन्जान सही मुझसे
    ज़िंदा हैं पर साँसे मेरी ही तुझसे_

    तुझे भूला सकुं पास
    वो मेरे दिल नहीं_

    माना तु ज़िन्दगी हैं मेरी
    मगर ज़िन्दगी में मेरी हासिल नहीं_

    -PRAGYA-

  • कफ़न

    सब एहसास दफ़न हो गये_

    जब वो पहलू में किसी के गुमराह हो गये हम ज़िंदा थे..कयामत की जूदाई आई और हम कफ़न हो गये_

    -PRAGYA-

  • #कृष्णा

    मंत्र मुग्ध हैं यशोदा देख ,
    अठखेलियाँ घनश्याम की_

    पाकर नंद भी उमंग से धरणी पर ,
    नृत्य करते दुलार करते श्याम की_

    शताब्दियाँ भी मुखरित थी अलौकिक छवि ,
    देख देवों के देव देवकिनदंन की_

    घटाएँ भी जमकर बरस रही थी
    जैसे चाहती हो छूना काया नंदपुत्राय की_

    बीत गया वो द्वापर यूग पर बिसराये ना बिसरत हैं ,
    वो महा भारतीय न्यायशील का न्याय,
    वो चक्र सी पलटती काया धरा की अगधाय की_
    -PRAGYA-

  • “गुरु की महत्ता”

    मोड़ दे जो पाणी की लकीरें,
    हैं वो गुरू ईश्वरीय वासव अद्भुत महान_
    तिमिर भी मयूख हो लेखन करें,
    गुरु हैं वो ग्रंथ कगार_
    अस्तित्व संपूर्ण परिवर्तित कर दे,
    शिष्य बने ज्ञानी हर ग्रंथ में प्रकांड_
    किचड़ से कमल सा चुन ले,
    हैं वो माली प्रधान_
    वसुंधरा भी ऋणी हैं जिसकी,
    हैं वो वत्स धरा का प्राण_
    प्रकृति भी वंचित नहीं वात्सल्य से जिसके,
    हैं वो तेजस्वी मान_
    वह वसुंधरा पर ही नहीं व्योम पर भी हैं विख्यात,
    द्वारपट खुल जाते हैं ईश्वर के,
    वो गुरु हैं अद्भुत ईश्वरीय सँतान_
    -PRAGYA-

  • पाक़ दिल

    लफ़्ज़ बिकते हैं इमान बिकते हैं जब बिकने पर आये तो क्या-क्या बिकते हैं ज़माने में__

    एक पाक़ दिल पिन्हां सा हैं जो दुनिया की किसी दौलत से ना पिघलता हैं ना बिकता हैं गालिबन मैं मालामाल हूँ उस दौलत से__

    -PRAGYA-

  • मजबूर दिल

    उसकी बेवफ़ाई पर हंसी आती हैं तो तरस भी__

    अभी अन्जान हैं वो मोहब्बत से..दिवाना कुछ इस कदर हैं समझ लेता हैं वो हर पत्थर को कोहिनूर भी__

    कभी मुलाक़ात ज़रूर होगी इज़हार-ए-मोहब्बत करने वाले अपनी झूठी नज़रों से हम पर क़रम ज़रूर करना_

    कहीं नज़रें झुक गई फिर दिल में हमारी तमन्ना भूल कर भी मत करना_

    -PRAGYA

  • नाराज़गी

    उसकी बेवफ़ाई पर हंसी आती हैं तो तरस भी__

    अभी अन्जान हैं वो मोहब्बत से..दिवाना कुछ इस कदर हैं समझ लेता हैं वो हर पत्थर को कोहिनूर भी__

    कभी मुलाक़ात ज़रूर होगी इज़हार-ए-मोहब्बत करने वाले अपनी झूठी नज़रों से हम पर क़रम ज़रूर करना_

    कहीं नज़रें झुक गई फिर दिल में हमारी तमन्ना भूल कर भी मत करना_

    -PRAGYA

  • बेवफ़ाई

    उसकी बेवफ़ाई पर हंसी आती हैं तो तरस भी__

    अभी अन्जान हैं वो मोहब्बत से..दिवाना कुछ इस कदर हैं समझ लेता हैं वो हर पत्थर को कोहिनूर भी__

    कभी मुलाक़ात ज़रूर होगी इज़हार-ए-मोहब्बत करने वाले अपनी झूठी नज़रों से हम पर क़रम ज़रूर करना_

    कहीं नज़रें झुक गई फिर दिल में हमारी तमन्ना भूल कर भी मत करना_

    -PRAGYA

  • एहसास-ए-ज़िदगी

    ऐसा कोई लम्हा नहीं गुज़रता जब सांसों से मेरी उसकी यादें ना गुज़रती हो__
    ये बात और हैं एहसासों से मेरे वो अंजान हैं मगर हालात-ए-जिस्त ये हैं की वही ज़िन्दगी हैं मेरी वही अरमान हैं-
    -PRAGYA-

  • ज़िन्दगी की तारीख

    ज़िन्दगी की तारीख नहीं होती_

    वरना हर तारीख पर फ़क़त ज़ख़्मों का हिसाब होता शाद-ए-लम्हें कहाँ खर्च हो गये कभी हिसाब ही नहीं मिलता_
    -PRAGYA-

  • “यार”

    जिनके यार खुदा से हो _

    उन्हें जहाँ तो क्या मौत से भी खौफ कहाँ से हो_

    -PRAGYA-

  • “खरोंचे “

    ज़िन्दगी कितनी खरोंचे दोगी_?

    अब तो रूह का रेशा-रेशा भी छील गया_

    -PRAGYA-

  • “दूरियाँ “

    दूरियों में तुझसे.. अजीब सा हाल हो गया हैं इस दिल का भी_

    जैसे इक नाकाम सा बुत पड़ा हो आती जाती सड़कों पर_
    -PRAGYA-

  • “ख्वाब “

    अब साँसे भी सोचकर लेती हूँ___
    कहीं ख़याल तेरे महकने ना लगे
    जो ख्वाब तुमने तोड़े थे
    कहीं दिल फिर उसे बुनने ना लगे___
    -PRAGYA

  • “दोस्त”

    जर्रा को आफ़ताब बना दे वो नज़र मेरे दोस्त की हैं_

    मैं इतनी क़ाबिल तो नहीं की इंसा के लिबास में फरिश्ता नज़र आऊं_

    बना दे मुझे जो फरिश्ता वो नज़र मेरे दोस्त की हैं_

    खँजर चले इस दिल पर हज़ारों मगर मुदावा ज़ख्मों का करती वो नज़र मेरे दोस्त की हैं__

    मैं तेरा एहसान चूका सकूं ए दोस्त इतनी मुझमें क़ाबलियत तो नहीं_
    क्यूंकि लहू का कतरा-कतरा मेरा तेरी मोहब्बत में डुबा हैं_
    मुझे सुकूँ के आब्शार से भिगो देती हर शय तेरी
    मुझे फिर भी जताती नहीं वो नज़र मेरे दोस्त की हैं_
    -PRAGYA-

  • “इश्क़ “

    तन्हा-तन्हा बौराई सी फिरती हूँ हुज़ूम में भी_

    कहकशाँ लगाती हूँ अपनी ही विरानियत में कुछ हाल-ए-बयां इश्क़ का इस तर्ज़ भी_

    -PRAGYA-

  • “कर्ज़”

    चूका ना सकोगे कभी उज़रत हमारे क़ब्ल की_

    दिल में शगुफ्ता सी मोहब्बत..वो कर्ज़ हैं तुम पर_

    -PRAGYA-

  • “खामोशी “

    ज़माना पुछता हैं चेहरे में गज़ब की कशीश- ए-खामोशी हैं_

    कैसे कहे_? हरसू से नूर का तिरगी से भी वास्ता हैं मैं नियूश सा सुनता हूँ दिल हर वक़्त उसका शोर मचाता हैं_

    -PRAGYA-

  • “खामोशी “

    ज़माना पुछता हैं चेहरे में गज़ब की कशीश- ए-खामोशी हैं_

    कैसे कहे_? हरसू से नूर का तिरगी से भी वास्ता हैं मैं नियूश सा सुनता हूँ दिल हर वक़्त उसका शोर मचाता हैं_

    -PRAGYA-

  • “मोहब्बत की सजा”

    जी रही हूँ..ज़िन्दगी का बोझ उठा रहीं हूँ_

    मोहब्बत की सज़ा बो गये हो तुम मैं गुनाहों की फसल काट रही हूँ_

    -PRAGYA-

  • जीद-ए-वस्ल

    रक़िब ना बनों उल्फ़त के खामख्वाह वस्ल की जीद से_

    दुरियों में ही सही लबरेज हैं दिल मोहब्बत से क्या इतनी आराईश काफी नहीं ढलती उम्र की पीड़ से_

    -PRAGYA-

  • “यादें “

    शब भर यादें तिरी शबनम सी दिल को भिगोती रहीं_

    दूरियाँ इस कदर दरम्यां हमारे सिमट गई की मैं छूती रहीं हर याद तिरी वो अब्तर हो बिखर गई_

    -PRAGYA-

  • “यकीं “

    यूँ तो बीत गये कई पल बिन तेरे भी_
    पर संग तेरे बीते वो अनमोल पल भुलाये नहीं भूलते_

    ताजिंदगी तुझे चाहने की रज़ामंदी हैं इस दिल की_
    मगर वफ़ा का तेरी मुझे यकीं के इस्बात नहीं मिलते_

    यकीं करूँ तो कैसे-? लबों पर तेरे लफ़्ज़ ठहरते ही नहीं_
    उन पर पाक़ सी तेरी चाहत के एहसास नहीं मिलते_

    फिर तोहमत-ए-बेवफाई हम पर कैसी_?
    वफ़ा ढूँढती नज़रों को तेरे निशां नहीं मिलते_
    यूंँ ही मोहब्बत के मेरी तुम्हें रूह में अपनी रेशा नहीं मिलते_
    -PRAGYA-

  • इंतज़ार

    शज़र भी सुख जाते हैं बंद दरवाजों में_

    हमें तो एक अरसा हो गया हैं इंतज़ार में तिरी कैद हुए_

    -PRAGYA-

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