खिलखिलाती रहो

तुम सदा मुस्कुराती रहो
खिलखिलाती रहो,
जीवन के आंगन में मेरे
नेह बिखराती रहो।
तुम्हारे नेह से
क्यारी में घर की
खूबसूरत फुलवारी सजी है
यूँ ही महकाती रहो
खुशबू बिखराती रहो।

Comments

15 responses to “खिलखिलाती रहो”

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

    1. सादर धन्यवाद

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  1. Geeta kumari

    वाह सर, जीवन में नेह.., घर की सुंदर फुलवारी ,बहुत सुन्दर शब्दों का चयन किया है ,खूबसूरत लेखन शैली । काबिले तारीफ़ रचना है सतीश जी आपकी लेखनी को प्रणाम AWESOME WRITING.

    1. आपने बहुत ही सुंदर समीक्षा की है। इस अनुपम समीक्षा शक्ति और लेखनी की प्रखरता को सादर अभिवादन

      1. Geeta kumari

        Welcome sir

  2. Chandra Pandey

    बहुत शानदार

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

  3. MS Lohaghat

    कमाल वाह

    1. Satish Pandey

      Thank you

  4. Piyush Joshi

    बहुत खूब, लाजबाव

    1. Satish Pandey

      Thanks

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