3 Comments

  1. “कर्म बिना इंसान, स्वयं का ही तो अरि है। कहे लेखनी कर्म बिना कुछ नहीं जगत में, राज कर्म ही चला रहा है सदा जगत में।”
    _____कर्म करने के प्रति सकारात्मक चेतना जागृत करती हुई कवि सतीश जी की बेहतरीन रचना। कुंडलिया छंद कृत बहुत ही सुन्दर और प्रेरक कविता।अति उत्तम प्रस्तुति

Leave a Reply