खुद को खामोश ही पाती हूं मैं

तुझसे कहां कुछ कह पाती हूं मैं
जब भी तुम होते हो सामने
खुद को खामोश ही पाती हूं मैं

Comments

3 responses to “खुद को खामोश ही पाती हूं मैं”

  1. Dharamveer Verma Avatar
    Dharamveer Verma

    बहुत अच्छा लिखती हैं, नीलम जी आप।

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

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