“खुद पे कुछ इस तरह से वार किया मैंने”

खुद पे कुछ इस तरह से वार किया मैंने।
तेरा न आना तय था इंतज़ार किया मैंने।।
,
जब थी फूलों सी फ़ितरत तो तोड़ा सबने।
अब तोहमतें है खुद को ख़ार किया मैंने।।
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मौसम मेरे मुताबिक़ कहाँ होने वाला था।
नाहक ही हवाओं पे इख़्तियार किया मैंने।।
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मुश्किले आती हैं दरिया की राह में अक्सर।
जब मुझकों बहना था सब पार किया मैंने।।
,
वहम था की हम नहीं कहतें हाल ए दिल।
जबकि लिख के सब अख़बार किया मैंने।।
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जिसनें किया था बारहा नज़र अंदाज़ मुझे।
उसी का इल्ज़ाम उसे दरकिनार किया मैंने।।
@@@@RK@@@@

Comments

7 responses to ““खुद पे कुछ इस तरह से वार किया मैंने””

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      धन्यवाद

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      धन्यवाद

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    Awesome

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