खुशबू यहाँ तक आ रही है

आपकी नेह भरी सोच की
खुशबू यहाँ तक आ रही है,
यह पवन दे मंद झोंका,
मन ही मन मुस्का रही है।
बात पूछो तो न बोली
बस इशारा कर रही है।
लग रहा है आपकी ही
भाँति यह शरमा रही है।
अबके जब भेजो पवन को
साफ कह देना इसे
छोड़कर सारी झिझक
सब कुछ बता देना मुझे।
डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत

Comments

7 responses to “खुशबू यहाँ तक आ रही है”

  1. वाह जी वाह, बनी रहे, मस्त कविता

    1. धन्यवाद जी

  2. मनोरम कविता

    1. सादर धन्यवाद

  3. Suman Kumari

    बहुत खूब

  4. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत सुंदर

  5. Geeta kumari

    बहुत सुंदर शिल्प और खूबसूरत शब्दों से परिपूर्ण अति सुन्दर कविता है । कवि सतीश जी की बहुत ही भाव पूर्ण रचना और उसकी शानदार प्रस्तुति

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