खोते अपने

जिसे अपना मानते आये
हर बात पर,
नुक्श निकालने को आमदा ,
देखते ही देखते
ये कैसे बेगाना हुआ ।
दर्द जब हद से बढ़ा
दिल पर बोझ बढने लगा
बोझिल सा यह मन
अश्क पलकों को भिगोने लगा
देखते ही देखते
ये कैसे बेगाना हुआ ।

Comments

6 responses to “खोते अपने”

  1. मार्मिक अभिव्यक्ति

    1. Suman Kumari

      सादर आभार गीता जी

  2. जिसे अपना मानते आये
    हर बात पर,
    नुक्श निकालने को आमदा ,
    देखते ही देखते
    ये कैसे बेगाना हुआ ।
    कुछ ऐसे ही होता है दिल का टूटना खिन्न मन की सुंदर भावाभिव्यक्ति की गई है..👏👏👌👌

    1. Suman Kumari

      सादर आभार शुक्लाजी

      1. 😃😃😃😃
        I’m so happy

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